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200 श्रमिक परिवारों को आवास और रोजगार की चिंता

                                        सुनीता कुमारी “सिर से छत भी गई फिर रोजगार भी गया इसके बाद हम लावारिस हो जाएंगे” यह कहना है रमेश का। ऐसा कहने के पीछे क्या वजह है और कौन है ये रमेश ?  दरअसल रमेश और उसकी पत्नी सुनीता सरोजिनी नगर की झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले श्रमिक हैं ।  दोनों मिलकर वहां इस्तरी का काम करते हैं। रमेश कपड़ों को धोता है और उनकी पत्नी उन कपड़ों में इस्तरी करती है।  सब कुछ ठीक चल रहा था पर अचानक से उनकी रोजी- रोटी और मकान पर संकट आ गया। रोटी, कपड़ा और मकान जीवन जीने के लिए बेहद जरूरी है। रमेश और सुनीता जैसे  200 श्रमिकों, मजदूर परिवारों के सामने अपने रोजगार को लेकर प्रश्नचिन्ह खड़ा हैं कि  क्या उनका रोजगार उनसे छिन जाएगा ? अगर हां तो फिर वे आगे क्या करेंगे? क्या उनके सिर पर छत रहेगी या नहीं ? आगे की जिंदगी कैसे चलेगी?  ये घटना है दिल्ली के सरोजनी नगर की। दरअसल सरकार सरोजनी नगर की झुग्गी झोपड़ियों को तोड़ कर वहां बड़ी-बड़ी कॉम्प्लेक्...

क्या गरीबों को रहने के लिए ज़मीन मिलेगी ?

इन दिनों बुलडोजर काफी सुर्खियों में छाया हुआ है। बुलडोजर का मतलब यमदूत का मशीनी संस्करण जो किसी वैध अपराधी या अवैध इमारत का एनकाउंटर कर रहा है। योगी के राज्य उत्तर प्रदेश से शुरू इसकी यात्रा मध्य प्रदेश, राजस्थान होते हुए दिल्ली को आ गई है। दिल्ली के जहांगीरपुरी में हुई घटना को तो सब जानते है जो काफी चर्चा में भी रहा। लेकिन एक ऐसी ही घटना दक्षिणी दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के खेलगांव फेज एक में भी हुई है। जहां दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) वालों ने झुग्गी झोपड़ियों के   ऊपर बुलडोजर चलवा   दि ।   जिसमें लगभग 30 से 40 झोपड़ियां टूट गई। ये लोग यहां मेट्रो लाइन के नीचे झुग्गी झोपड़ी बनाकर अपना गुजर-बसर करते है। हर झोपड़ी में कम से कम   चार सदस्यों का एक परिवार रहता है , किसी- किसी परिवार में पांच और किसी में छह सदस्य लोग भी रहते है। इस तरह इस अतिक्रमण से सैकड़ों लोगों के सर से छत उजड़ गया। इसके अलावा उनका रोजगार भी छिन रहा है। वहां के ज्यादातर परिवार के पुरुष वहीं   फूलों की नर्सरी की खेती करते हैं जो उनकी आय का प्रमुख स्रोत है। महिलाएं आसपास के घरों में मजदू...

खेती में फिर से लौट रहे हैं पशुओं के अच्छे दिन...

                                        हाल के वर्षों में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में बैलगाड़ी के उपयोग को पुनर्जीवित किया जा रहा है। जैविक खेती और पशुओं के उपयोग को समझते हुए वैज्ञानिक इस पर तरह-तरह के नए प्रयोग कर रहे हैं। भारत जैसे देश में इस संशोधित परंपरा या तकनीक को अपनाए जाने की संभावनाएं ज्यादा है क्योंकि मशीनीकरण ने मुख्यरूप से  बड़े किसानों को लाभ पहुंचाया है। वही दो हेक्टेयर से कम जोत वाले छोटे और सीमांत किसानों के लिए ट्रैक्टर एक महंगा सौदा है। इसके अलावा पशुओं से खेती करने के और भी फायदे सामने आ रहें हैं। बिजली बनाने वाली बैलगाड़ी कर्नाटक के रायचूर में स्थित कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय ने एक ऐसी बैलगाड़ी बनाई है जो आवाजाही से बिजली उत्पन्न करती है। 2014 में  बनी यह बैलगाड़ी हर बार चलने पर बिजली उत्पन्न करती है, जो गाड़ी के नीचे रखी बैटरी में संग्रहित हो जाती है। इससे 5 घंटे में 2,192.4 करोड़ किलोवाट वार्षिक ऊर्जा उत्पन्न कर सकते हैं। वर...

गणतंत्र विशेषाकं

भारतीय  गणतंत्र  में अपना परचम लहराती भारतीय महिलाएं.... जो महिलाएं अपनी शक्ति पहचान लेतीं हैं, सफलता उनकी कदम चुमती है। अपने जज्ब़े, हौसलें और मेहनत से अपने सपनों को सच करतीं महिलाएं, हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रहीं हैं। बिजनेस हो या बॉलीवुड, राजनीति हो या रणभूमि, खेल हो या सेना की फौज यानि हर जगह पुरुषों के साथ महिलाएं भी बराबरी से अपना योगदान दें रहीं हैं। रक्षा क्षेत्र में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहीं हैं और साबित कर रहीं हैं कि किसी भी मामलें में “ छोड़ियां छोड़ो से कम न है ” । तो आइए जानते हैं देश की कुछ ऐसी ही नायिकाओं के बारें में.... अवनि चतुर्वेदी – आसमान में पंछियों को उड़ता देख, खुद भी उन्हीं की तरह उड़ने का सपना देखने वाली अवनि चतुर्वेदी ने अपने हौसलों की उड़ान से अपने सपने को सच कर दिखाया। मिग-21 जैसे लड़कू विमान को अकेले उड़ाकर देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनने का गौरव प्राप्त किया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि कोई भी काम महिलाओं के लिए नामुमकिन नहीं, उन्होंने न सिर्फ अपना सपना पूरा किया बल्कि महिलाओं के लिए फाइटर पायलट बनने का दरवाजा भी खोल दिया। वर्तमा...

प्रवासी भारतीय दिवस

  प्रवासी भारतीयों का हार्दिक अभिनन्दन                           https://imalayalee.org/sites/default/files/photos/pravasi-bhartiya-diwas.jpg भारत के विकास में प्रवासी भारतीयों के योगदान को चिन्हित करने, उनकी भावनाओं को विस्तार देने  और विदेशो में श्रमिकों के श्रम संबंधी कठिनाइयों को समझने व उन्हें दूर करने की कोशिश के लिए एक मंच के रुप में प्रतिवर्ष 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है।  9 जनवरी को ही क्यो  मनाया जाता है  ? 9 जनवरी 1915, यहीं वो तारीख है जब महात्मा गाँधी, दक्षिण अफ्रिका से भारत वापस लौटे। अपने देश से दूर, पराए देश में 22 वर्षों की लम्बी समयावधि तक रहने के कारण महात्मा गाँधी को भारत के सबसे बड़े प्रवासियों में से एक माना जाता है। 18वीं शताब्दी में गुजराती व्यापारी बहुत सारे देशों में मसलन केन्या, युगांडा, जिम्बाबे और दक्षिण अफ्रिका इत्यादि देशों में गए। इन्हीं गुजराती व्यापारियों में से एक थे दादा अब्दुला सेठ, जिनके कानूनी प्रतिनिधि के रुप में गाँधीजी 1893 में दक्...

"कोरोना" और "एशियाई लोगों के साथ नस्लीय भेदभाव "

  कोरोना के समय में वैश्विकस्तर पर एशियाई लोगों के साथ नस्लीय भेदभाव https://www.hrw.org/sites/default/files/media_2021/02/202102us_protest_oklahoma.jpg एशिया के एक देश, चीन के वुहान शहर से कोरोना वायरस की उत्पत्ती मानी जाती है। इस वजह से दुनिया के अन्य देशों के लोगों द्वारा एशियाई लोगों के साथ नस्लीय भेदभाव किया जा रहा है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंम्प की बयानबाजी ने कोरोना वायरस को “ चीन वायरस ” बताया, जिसने अंतराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं। विशेषज्ञों का कहना है कि भड़काऊ टिप्पणियों ने सोशल मीडिया और वास्तविक जीवन में नफरत फैलाने में मदद की। एशियाई समुदायों को लक्षित करने वाले घृणा अपराधों या नस्लीय भेदभाव में वैश्विक वृद्धि की कई घटनाएं सामने आ रही है। पिछली गर्मियों में इटली,रूस और ब्राजील में हयूमन राइट्स वॉच द्वारा दिए गए रिपोर्टों में एशियाई विरोधी भेदभाव और जेनोफोबिया से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। न्यूजीलैंड में, न्यूजीलैंड मानवाधिकार आयोग द्वारा पिछले महीने जारी किए गए एक शोध में पाया गया कि 54 प्रतिशत चीनियों ने शुरूआत के बाद नस्लीय भेदभाव का सामना किया था। य...

“मीड डे मील” और" बच्चों की सेहत"

https://new-img.patrika.com/upload/2020/01/09/middaymeal_6403504_835x547-m.jpg   सरकारी स्कूल में फूड पैकेट बांटने का टेंडर रद्द, बच्चों को मिलेंगे पैसे झारखण्ड राज्य  के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को “ मीड डे मील ” (एम.डी.एम) का फूड पैकेट देने का टेंडर तत्काल प्रभाव से पूर्णत : रद्द कर दिया गया है। इसके बदले बच्चों को “ कुकिंग कोस्ट ” (खाना के बदले पैसा) देने की तैयारी की जा रही है। कुकिंग कोस्ट में चावल के अलावा दाल, नमक, तेल मसाला सब्जी आदि के हिसाब से राशि दी जाएगी। यह राशि प्रतिदिन एक छात्र पर लगभग 5 रुपये(कक्षा एक-पाँच तक) और   लगभग  8  रुपये (कक्षा छ : -आठ तक) के हिसाब से छात्र-छात्राओं को दिया जाएगा ।  इसके अलावा 28 दिसम्बर तक बच्चों को पोशाक, स्वेटर और जूता-मौजा देने के लिए 217 करोड़ रुपयों  का आबंटन किया गया है। इस संबंध में स्कूली शिक्षा एंव साक्षरता विभाग के सचिव राजेश शर्मा ने सभी स्वयंसेवी समूहों को आदेश दिया है कि पोशाक उपलब्ध न कराए जाने पर बच्चों के बैंक खाते में राशि ट्रांसफर की जाएगी। ऐसे में सवाल उठता है कि सरक...