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Showing posts from April, 2022

क्या गरीबों को रहने के लिए ज़मीन मिलेगी ?

इन दिनों बुलडोजर काफी सुर्खियों में छाया हुआ है। बुलडोजर का मतलब यमदूत का मशीनी संस्करण जो किसी वैध अपराधी या अवैध इमारत का एनकाउंटर कर रहा है। योगी के राज्य उत्तर प्रदेश से शुरू इसकी यात्रा मध्य प्रदेश, राजस्थान होते हुए दिल्ली को आ गई है। दिल्ली के जहांगीरपुरी में हुई घटना को तो सब जानते है जो काफी चर्चा में भी रहा। लेकिन एक ऐसी ही घटना दक्षिणी दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के खेलगांव फेज एक में भी हुई है। जहां दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) वालों ने झुग्गी झोपड़ियों के   ऊपर बुलडोजर चलवा   दि ।   जिसमें लगभग 30 से 40 झोपड़ियां टूट गई। ये लोग यहां मेट्रो लाइन के नीचे झुग्गी झोपड़ी बनाकर अपना गुजर-बसर करते है। हर झोपड़ी में कम से कम   चार सदस्यों का एक परिवार रहता है , किसी- किसी परिवार में पांच और किसी में छह सदस्य लोग भी रहते है। इस तरह इस अतिक्रमण से सैकड़ों लोगों के सर से छत उजड़ गया। इसके अलावा उनका रोजगार भी छिन रहा है। वहां के ज्यादातर परिवार के पुरुष वहीं   फूलों की नर्सरी की खेती करते हैं जो उनकी आय का प्रमुख स्रोत है। महिलाएं आसपास के घरों में मजदू...

खेती में फिर से लौट रहे हैं पशुओं के अच्छे दिन...

                                        हाल के वर्षों में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में बैलगाड़ी के उपयोग को पुनर्जीवित किया जा रहा है। जैविक खेती और पशुओं के उपयोग को समझते हुए वैज्ञानिक इस पर तरह-तरह के नए प्रयोग कर रहे हैं। भारत जैसे देश में इस संशोधित परंपरा या तकनीक को अपनाए जाने की संभावनाएं ज्यादा है क्योंकि मशीनीकरण ने मुख्यरूप से  बड़े किसानों को लाभ पहुंचाया है। वही दो हेक्टेयर से कम जोत वाले छोटे और सीमांत किसानों के लिए ट्रैक्टर एक महंगा सौदा है। इसके अलावा पशुओं से खेती करने के और भी फायदे सामने आ रहें हैं। बिजली बनाने वाली बैलगाड़ी कर्नाटक के रायचूर में स्थित कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय ने एक ऐसी बैलगाड़ी बनाई है जो आवाजाही से बिजली उत्पन्न करती है। 2014 में  बनी यह बैलगाड़ी हर बार चलने पर बिजली उत्पन्न करती है, जो गाड़ी के नीचे रखी बैटरी में संग्रहित हो जाती है। इससे 5 घंटे में 2,192.4 करोड़ किलोवाट वार्षिक ऊर्जा उत्पन्न कर सकते हैं। वर...