सुनीता कुमारी “सिर से छत भी गई फिर रोजगार भी गया इसके बाद हम लावारिस हो जाएंगे” यह कहना है रमेश का। ऐसा कहने के पीछे क्या वजह है और कौन है ये रमेश ? दरअसल रमेश और उसकी पत्नी सुनीता सरोजिनी नगर की झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले श्रमिक हैं । दोनों मिलकर वहां इस्तरी का काम करते हैं। रमेश कपड़ों को धोता है और उनकी पत्नी उन कपड़ों में इस्तरी करती है। सब कुछ ठीक चल रहा था पर अचानक से उनकी रोजी- रोटी और मकान पर संकट आ गया। रोटी, कपड़ा और मकान जीवन जीने के लिए बेहद जरूरी है। रमेश और सुनीता जैसे 200 श्रमिकों, मजदूर परिवारों के सामने अपने रोजगार को लेकर प्रश्नचिन्ह खड़ा हैं कि क्या उनका रोजगार उनसे छिन जाएगा ? अगर हां तो फिर वे आगे क्या करेंगे? क्या उनके सिर पर छत रहेगी या नहीं ? आगे की जिंदगी कैसे चलेगी? ये घटना है दिल्ली के सरोजनी नगर की। दरअसल सरकार सरोजनी नगर की झुग्गी झोपड़ियों को तोड़ कर वहां बड़ी-बड़ी कॉम्प्लेक्...