Skip to main content

Posts

Showing posts from January, 2022

गणतंत्र विशेषाकं

भारतीय  गणतंत्र  में अपना परचम लहराती भारतीय महिलाएं.... जो महिलाएं अपनी शक्ति पहचान लेतीं हैं, सफलता उनकी कदम चुमती है। अपने जज्ब़े, हौसलें और मेहनत से अपने सपनों को सच करतीं महिलाएं, हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रहीं हैं। बिजनेस हो या बॉलीवुड, राजनीति हो या रणभूमि, खेल हो या सेना की फौज यानि हर जगह पुरुषों के साथ महिलाएं भी बराबरी से अपना योगदान दें रहीं हैं। रक्षा क्षेत्र में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहीं हैं और साबित कर रहीं हैं कि किसी भी मामलें में “ छोड़ियां छोड़ो से कम न है ” । तो आइए जानते हैं देश की कुछ ऐसी ही नायिकाओं के बारें में.... अवनि चतुर्वेदी – आसमान में पंछियों को उड़ता देख, खुद भी उन्हीं की तरह उड़ने का सपना देखने वाली अवनि चतुर्वेदी ने अपने हौसलों की उड़ान से अपने सपने को सच कर दिखाया। मिग-21 जैसे लड़कू विमान को अकेले उड़ाकर देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनने का गौरव प्राप्त किया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि कोई भी काम महिलाओं के लिए नामुमकिन नहीं, उन्होंने न सिर्फ अपना सपना पूरा किया बल्कि महिलाओं के लिए फाइटर पायलट बनने का दरवाजा भी खोल दिया। वर्तमा...

प्रवासी भारतीय दिवस

  प्रवासी भारतीयों का हार्दिक अभिनन्दन                           https://imalayalee.org/sites/default/files/photos/pravasi-bhartiya-diwas.jpg भारत के विकास में प्रवासी भारतीयों के योगदान को चिन्हित करने, उनकी भावनाओं को विस्तार देने  और विदेशो में श्रमिकों के श्रम संबंधी कठिनाइयों को समझने व उन्हें दूर करने की कोशिश के लिए एक मंच के रुप में प्रतिवर्ष 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है।  9 जनवरी को ही क्यो  मनाया जाता है  ? 9 जनवरी 1915, यहीं वो तारीख है जब महात्मा गाँधी, दक्षिण अफ्रिका से भारत वापस लौटे। अपने देश से दूर, पराए देश में 22 वर्षों की लम्बी समयावधि तक रहने के कारण महात्मा गाँधी को भारत के सबसे बड़े प्रवासियों में से एक माना जाता है। 18वीं शताब्दी में गुजराती व्यापारी बहुत सारे देशों में मसलन केन्या, युगांडा, जिम्बाबे और दक्षिण अफ्रिका इत्यादि देशों में गए। इन्हीं गुजराती व्यापारियों में से एक थे दादा अब्दुला सेठ, जिनके कानूनी प्रतिनिधि के रुप में गाँधीजी 1893 में दक्...